जातिवाद क्या है ? इसका अर्थ क्या है ?

हेलो दोस्तों ज्ञान उदय में आपका स्वागत है, आज की Post में हम जानेंगे जातिवाद के बारे में | जातिवाद क्या है ? इसका अर्थ क्या है ? समाज पर इसके पड़ने वाले प्रभाव कौन से हैं और जातिवाद को दूर करने के लिए क्या क्या उपाय किए जा सकते हैं ?

जातिवाद क्या है ?

दोस्तों भारतीय समाज में जाति व्यवस्था ने अपना रूप बहुत गहरे से जमा लिया है | जातिवाद दो शब्दों से मिलकर बना है | जाति और वाद, दोस्तों जातिवाद एक प्रकार से अपनी जाति को सर्वश्रेष्ठ मानने का सिद्धांत है | जातिवाद में कोई एक जाति होती है, वह अपनी जाति को दूसरी जातियों से सर्वश्रेष्ठ मानती है और इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि अपनी जाति को सर्वश्रेष्ठ मारने के चक्कर में यह दूसरी जातियों को अपने से कमतर मानने लगती है और यहीं से जातीय श्रेष्ठता और जातीय विद्वेष उत्पन्न होता है |

दोस्तों जातिवाद एक संकीर्ण भावना है और अपनी संकीर्णता की वजह से वर्तमान में यह एक नकारात्मक अवधारणा का रूप ले चुका है और केवल अपनी जाति के प्रति निष्ठा भाव ही जातिवाद है | दोस्तों जो भारतीय सामाजिक संरचना रही है, उसमें जातिवाद बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है | इसका नुकसान तो अधिक है फायदे कम है | जातिवाद किसी एक जाति के सदस्यों की एक ऐसी संकुचित भावना है, जो राष्ट्र और समाज के सामान्य हितों की अवहेलना करती है और अपनी जाति के सदस्यों यानी अब एक जाति विशेष के सदस्यों के हितों को बढ़ावा देती है | केवल अपनी ही जाति को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करती है और इसके लिए वह कई प्रकार के उपाय भी करती है |

समाज पर इसके पड़ने वाले प्रभाव

आप जानते हैं कि पहले यह अपने यहां जो हमारा सामाजिक संरचना थी, वह वर्ण व्यवस्था यहां पर आधारित थी | भारतीय समाज का यह वर्ण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग रही है और इससे सामाजिक और राजनीतिक जीवन के सभी पहलुओं को प्रभावित किया है, लेकिन वर्तमान युग में व्यक्ति की जाति जो है वह जन्म से निर्धारित होती है | कर्म से नहीं और इस प्रकार प्राचीन व्यवस्था की विकृति के प्रधान सोनू जात व्यवस्था उत्पन्न हुई और जन्म से ही उसकी जाति किसी व्यक्ति की जाति निर्धारित कर दी जाती है और वह अपने जाति को नहीं बदल सकता है | आप किसी जिस जाति में उत्पन्न होते हैं उसी जाति के हो कर रह जाते हैं |

जाति-व्यवस्था यह एक जाति के लोगों की वह भावना है, जो अपनी जाति विशेष के हितों की रक्षा के लिए अन्य जातियों के हितों की अवहेलना भी करती है और इस भावना के आधार पर एक जाति के लोग अपने स्वार्थ के लिए अपने लाभ के लिए या अपने जातीय दंभ भैया श्रेष्ठता के लिए अन्य जातियां दूसरे जाति के लोगों को हानि में पहुंचाने के लिए प्रेरित होते हैं | दोस्तों भारतीय समाज में जातिवाद जो है बहुत गहरे से बैठी हुई है और भारतीय समाज पर जातिवाद के दुष्प्रभाव अधिक व्यापक गंभीर और दूरगामी है क्योंकि जात व्यवस्था सामाजिक संरचना से जुड़ा हुआ मुद्दा है लेकिन इसका प्रभाव ने केवल समाज पर बल्कि राजनीति पर भी पड़ता है और आज राजनीति में जातिवाद का प्रभाव इतने गहरे से बैठ चुका है यह अपना प्रभाव इतना व्यापक कर चुका है कि विभिन्न राजनीतिक दल जो है जाति समीकरणों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करते हैं और किसी क्षेत्र विशेष में जाति के आधार पर अपने उम्मीदवारों को तय करते हैं, ताकि किसी जाति विशेष के आधार पर वहां पर उनको जीत या विजयश्री हासिल हो सके |

जातिवाद अधिक सामाजिक जहर है | इसने भारतीय समाज को बहुत अधिक विषाक्त कर दिया है | इसका इलाज हो पाना कठिन हो गया है | भारतीय समाज की अवनति और पतन के लिए कई कारक उत्तरदाई हैं, लेकिन इन सबमें जातिवाद बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है और जातिवाद प्रमुख कारक रहा है | जातिवाद ने केवल सामाजिक एकता को समाप्त करता है, बल्कि जाति और वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय एकता में बाधक होता है | इसे राजनीतिक भ्रष्टाचार और नैतिक पतन की भी संभावना होती है |

जातिवाद समाज की गतिशीलता और विकास में भी बाधक है | कई प्रकार की समस्याएं जो है | जातिवाद के कारण भी उत्पन्न होती हैं और लोकतंत्र में जातिवाद जो है वह कहीं न कहीं किसी एक जाति विशेष के सीमित हितों के लिए वह बहुसंख्यकों के हितों को जो है | वह प्रभावित करता है |

जातिवाद को समाप्त करने के उपाय

जातिवाद को ख़त्म करने के कई उपाय भी हो सकते हैं, कई उपाय किए जा सकते हैं | उनके बारे में जान लेते हैं | जातिवाद को जन्म देने वाली वो कुप्रथा जो है इसको एकदम से समाप्त नहीं किया जा सकता है | लेकिन इस दिशा में कुछ प्रयास किए जा सकते हैं | जैसे अंतरजातीय विवाहों को प्रोत्साहन दिया जाए | जाति बंधन ढूंढने पड़ेंगे इसके अलावा जातिसूचक उपनाम या जो टाइटिल लगाए जाते हैं उन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए | साथ ही जातिगत आधार पर होने वाले चुनाव उन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और जाति विशेष या वर्गीय हितों के आधार पर इनका जो है विरोध और बहिष्कार किया जाना चाहिए | इसके अलावा जाति प्रथा के विरुद्ध प्रचार प्रसार और लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए और समाज में जो आर्थिक और सामाजिक असमानता और भेदभाव है उसको समाप्त करने की व्यवस्था की जानी चाहिए क्योंकि विभिन्न जाति तु देखे जाएं तो विभिन्न जातियों के लोग कुछ जातियों के लोग श्रेष्ठ और उच्च मानते हैं | अपने आपको और कुछ जातियों को हीन माना जाता है, यह जातिवाद का सबसे अधिक दुष्प्रभाव है | दूसरा जब हम अंतरजातीय विवाहों को प्रोत्साहन देंगे जाति पात में भेद को खत्म करेंगे तो इस जातिवाद जैसी बुराई से निपटा जा सकता है |

तो दोस्तों यह था जातिवाद क्या है | इसका आशय क्या है और इसके प्रभाव क्या पढ़ते हैं | सामाजिक और राजनीतिक जीवन पर तथा साथ ही हमने देखा कि जातिवाद को कैसे समाप्त किया जा सकता है | तो दोस्तों Post को लाइक करें | शेयर करें और इस Post ko read लिए धन्यवाद ||

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