अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अर्थ एवं परिभाषा

Meaning of International Politics

Hello दोस्तों ज्ञानउदय में आपका एक बार फिर स्वागत है और आज हम बात करते हैं, अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अंतर्गत इसके अर्थ और परिभाषाओं के बारे में । अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक बहुत बड़ा विषय है जिसके अंतर्गत देश व विदेश से संबंधित मुद्दों पर बात की जाती है । आइए जानते हैं आसान भाषा में ।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अर्थ

साधारण शब्दों में अगर बात की जाए तो राष्ट्रों के मध्य पाई जाने वाली राजनीति को अंतरराष्ट्रीय राजनीति कहते हैं । साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति उन क्रियाओं का अध्ययन करना है, जिसके अंतर्गत राज्य अपने राष्ट्र हितों की पूर्ति हेतु शक्ति के आधार पर संघर्ष करते हैं । इस संदर्भ में राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख लक्ष्य होते हैं । संघर्ष इसका दिशा निर्धारित करता है तथा शक्ति उद्देश्य प्राप्ति का प्रमुख साधन माना जाता है ।

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अध्ययन विषय के रूप में अंतरराष्ट्रीय राजनीति

एक अध्ययन के विषय के रूप में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को बीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक से लेकर आज तक लगातार अधिक से अधिक लोकप्रियता मिल रही है तथा आज इसे एक विषय के रूप में लगभग सभी देशों में मान्यता प्राप्त हो गई है । अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अर्थ है, राज्यों के मध्य राजनीति । यदि राजनीति के अर्थ का अध्ययन करें तो इसके तीन प्रमुख तत्व सामने आते हैं ।

1) समूहों का अस्तित्व

2) समूह के बीच असहमति तथा तीसरा

3) समूह द्वारा अपना हितों की पूर्ति

इस आशय को यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकलन करें तो, यह तीन प्रमुख तत्वों मुख्य रूप से

अ) राज्यों का अस्तित्व

ब) राज्यों के बीच संघर्ष तथा

स) राष्ट्रीय हितों की पूर्ति हेतु शक्ति का प्रयोग के रूप में

इन सब बातों को हम परंपरागत मान सकते हैं, क्योंकि आज अंतरराष्ट्रीय राजनीति का स्थान इससे व्यापक अवधारणा,अंतरराष्ट्रीय संबंधों ने ले लिया है । इसके अंतर्गत राज्यों के परस्पर संघर्ष के साथ-साथ सहयोगात्मक पहलुओं को भी अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है । इसके अतिरिक्त आज राज्यों के अलावा अन्य कई कारण भी हैं । अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विषय क्षेत्र बन गए हैं ।

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अतः इसके अंतर्गत आज व्यक्ति, संस्था, संगठन व कई अन्य गैर राज्य भी सम्मिलित हो गई है । इसका वर्तमान आधार व विषय क्षेत्र आज काफी व्यापक रूप ले चुका है और इसका दायरा भी काफी बढ़ चुका है । इन सभी विषयों पर चर्चा से पहले अलग-अलग विद्वानों द्वारा दी गई उनकी परिभाषा को जान लेते हैं ।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति की परिभाषाएं

अंतरराष्ट्रीय राजनीति की परिभाषा ओं को भी दो भागों में बांटा जा सकता है । जिनमें i) परंपरागत और ii) समसामयिक परिभाषाओं को शामिल किया गया है । परंपरागत परिभाषा के अंतर्गत राज्यों को ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति के कारक के रूप में माना गया है । यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति के स्वरूप तक ही सीमित है । परंपरागत रूप में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अंतर्गत निम्न विद्वान बताते हैं ।

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मरगेन्थथयूं के अनुसार

“अंतरराष्ट्रीय राजनीति शक्ति के लिए संघर्ष है ।”

इसके अलावा समसामयिक परिभाषाओं में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के व्यापक स्वरूप, अंतरराष्ट्रीय संबंधों की चर्चा की गई है । इसमें राज्य के अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय राजनीति के नवीन कारकों जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन, देशांतर समूह, गैर सरकारी संगठन, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, कुछ व्यक्तियों आदि को भी शामिल किया गया है । इसके अलावा इसमें संघर्ष के साथ-साथ सहयोग तथा राजनीति के साथ-साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसे प्रभावित करने वाले कारक जैसे सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, विज्ञान एवं तकनीकी आदि । पहलुओं को भी उल्लेख किया गया है । विभिन्न लेखकों की परिभाषाओं द्वारा इसका आशय स्पष्ट उजागर होता है ।

क्विनसी राइट के अनुसार

“अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल राज्यों के संबंधों को ही नियमित नहीं करता, अपितु इसके विभिन्न प्रकार के समूह जैसे राष्ट्र, राज्य, लोग, गठबंधन, क्षेत्र, परिसंघ, अंतरराष्ट्रीय संगठन, औद्योगिक संगठन, धार्मिक संगठन आदि के अध्ययनों को भी इसमें शामिल करना होगा ।”

इस तरह से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का स्वरूप प्रारंभ से वर्तमान तक बहुत व्यापक हो जाता है । इसमें आज राष्ट्र, राज्यों के साथ विभिन्न विश्व इकाइयों एवं संगठनों के अध्ययन का समावेश हो चुका है । परंतु इन सभी परिवर्तनों के बाद भी इन अध्ययनों का केंद्र बिंदु आज भी राष्ट्र राज्य ही है ।

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अंतरराष्ट्रीय राजनीति का स्वरूप

आइये अब जानते हैं, अंतरराष्ट्रीय राजनीति के स्वरूप के बारे में । उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर इसके स्वरूप के बारे में निष्कर्ष सामने आते हैं, जो इस तरह हैं ।

1) इन परिभाषाओं से एक बात बिल्कुल स्पष्ट होती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति अभी भी बदलाव के दौर से गुजर रही हैं । इसके बदलाव की प्रक्रिया अभी स्थाई रूप से स्थापित नहीं हुई है, अपितु यह अपने विषय क्षेत्र के बारे में आज भी नवीन प्रयोगों और विषयों के समावेश से जुड़ी हुई है ।

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2) इसके अलावा एक अन्य बात उभर कर सामने आती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की स्थिति बहुत जटिल है । इसके अध्ययन हेतु बहुआयामी प्रयासों की जरूरत होती है ।

3) यह निश्चित है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अध्ययन का केंद्र बिंदु राज्य ही है । परंतु यह भी काफी हद तक सही है कि इसके अंतर्गत राज्यों के अतिरिक्त विभिन्न संगठनों, समुदायों, संस्थाओं आदि का अध्ययन करना अति अनिवार्य हो गया है ।

4) अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अध्ययन हेतु विभिन्न स्तरों एवं आयामों का अध्ययन जरूरी है । अतः इस विषय का अध्ययन अत्यंत अनुशासकीय आधार पर अधिक कुशलता पूर्वक हो सकता है ।

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5) अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अध्ययन हेतु नए नए दृष्टिकोण की उत्पत्ति हो रही है । जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलाव आता है । उसके अध्ययन एवं सामान्य एकीकरण हेतु नए उपागमों की आवश्यकता होती है । उदाहरण के स्वरूप द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जहां यथार्थवाद, व्यवस्थावादी, क्रीडा, सौदेबाजी तथा निर्णय पर उपागम की उत्पत्ति हुई । उसी तरह अब उत्तर शीतयुद्ध युग में उत्तर आधुनिकता विश्व व्यवस्था सिद्धांत आदि की उत्पत्ति हुई । भावी विश्व में भी वैश्वीकरण व इससे जुड़े मुद्दों पर नए उपागम के कार्यरत होने की व्यापक संभावनाएं हैं ।

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निष्कर्ष के रूप में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का स्वरूप परिवर्तनशील है । जब-जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति के परिवेश, कारकों व इसके घटनाक्रम में परिवर्तन आएगा, इसके अध्ययन करने के तरीकों व दृष्टिकोण में भी बदलाव जरूरी है । इसके अलावा यह परिवर्तन स्थाई ना होकर निरंतर है । इसके साथ-साथ विभिन्न कारकों, स्तरों, आयामों आदि के कारण यह बहुत जटिल है । अतः इसकी सुचारू अध्ययन हेतु बहुत स्पष्ट, तर्कसंगत, व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है ।

तो दोस्तों यह था अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अर्थ (Meaning of International Politics) एवं उसकी परिभाषाओं व इसके स्वरूप के बारे में । अगर आपको यह Post अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर Share करें । तब तक के लिए धन्यवाद !!

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