प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली

Direct and indirect Electoral System

Hello दोस्तों ज्ञानउदय में आपका स्वागत है और आज हम बात करेंगे राजनीति विज्ञान में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निर्वाचन चुनाव प्रणाली के बारे में (Direct and Indirect Election System in hindi). साथ ही साथ जानेंगे इसके गुण और दोष के बारे में, इसके महत्व और विशेषताएं । तो शुरू करते हैं, आसान भाषा में । चुनाव ही राजनीतिक शक्ति की वैधता की परीक्षा करते हैं और सत्ता को औचित्य पूर्ण बनाते हैं ।

चुनाव या निर्वाचन क्या है ? What is Electoral ?

यह एक ऐसी प्रक्रिया है । जिसमें जनता के द्वारा अनेक पक्षों में से किसी एक को सरकार बनाने के लिए चुना जाता है । इस प्रणाली में भाग लेने वाले व्यक्तियों की एक निश्चित आयु हरेक देश द्वारा निर्धारित की गई है । भारत में मतदाता की आयु को 18 वर्ष रखा गया है । चुनाव में भाग लेने वाले व्यक्ति को पहले नामांकन कराना आवश्यक है । हर देश में चुनाव का अपना महत्व होता है और चुनाव के अलग अलग तरीके अपनाए जाते हैं ।

चुनाव और प्रतिनिधित्व के बारे में विस्तार से जानकारी के लिए यहाँ Click करें ।

निर्वाचन का महत्व और विशेषताएं

जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि आधुनिक समय में चुनावों का बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है । चुनाव जनता के हाथ में वह शक्ति है, जिसके द्वारा वह अपनी इच्छा के अनुसार अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं और अपने जनाधार द्वारा राजनीतिक दलों को सरकार बनाने के योग्य बनाते हैं । हर देश में राजनीतिक शासन को चलाने के लिए चुनाव प्रणाली का प्रयोग किया जाता है । लोकतांत्रिक देशों में तो चुनाव का बहुत ज्यादा महत्व होता है, क्योंकि यह सरकार चुनाव प्रणाली पर आधारित सरकार होती है । जो चुनावों से ही प्राप्त करती है । चुनावों के द्वारा जनता अपने प्रतिनिधि को चुनती है । इस तरह चुनाव के द्वारा ही प्रतिनिधित्व को चुना जाता है । वर्तमान में लगभग सभी देशों में दो प्रकार की चुनाव प्रणालियां मौजूद हैं ।

1) प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली (Direct Electoral System) और

2) अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली (Indirect Electoral System)

1) प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली (Direct Electoral System)

सबसे पहले हम बात करते हैं, प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की । जब कोई मतदाता चुनाव प्रकिया द्वारा अपने उम्मीदवार या प्रतिनिधि को प्रत्यक्ष रूप से वोट डालकर चुनते हैं । तो उसे प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली कहा जाता है । इस प्रणाली के अंतर्गत हर राजनीतिक पार्टी का उम्मीदवार प्रत्येक मतदाता के पास जाकर उन्हें ही वोट देने का अनुरोध करते हैं और चुने जाने के बाद विजयी उम्मीदवार भी अपना किये गये वादों को पूरा करते हैं । इस प्रणाली के अंतर्गत प्रतिनिधि सरकार का गठन होता है । जो जनता के प्रति उत्तरदायी होती है ।

संसदीय कार्यपालिका के बारे में जानने के लिए यहाँ Click करें ।

इसी प्रणाली के द्वारा भारत में स्थानीय विधानमंडलों में अधिकतर सदस्य द्वारा चुने जाते हैं । इसी प्रकार से स्थानीय संस्था के प्रतिनिधियों व लोकसभा के सदस्यों का भी चुनाव किया जाता है । आइए अब प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के गुणों के बारे में जान लेते हैं ।

प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के गुण या लाभ

प्रत्यक्ष चुनाव सबसे सरल और आसानी से सभी के द्वारा स्वीकृत प्रणाली मानी जाती है । यह निर्वाचन की प्रचलित प्रणाली है । इसकी कुछ विशेषताएं निम्नलिखित हैं ।

१) इस चुनाव प्रणाली से लोगों में राजनीतिक जागरूकता और चेतना उत्पन्न होती है । जनता को राजनीति को समझने का मौका मिलता है ।

२) इसमें निर्वाचन संबंधी भ्रष्टाचार के पनपने की संभावना कम मानी जाती है । क्योंकि इसमें प्रतिनिधि का जनता के बहुमत द्वारा चुना जाता है ।

३) इस चुनाव प्रणाली में जनता को पूरी स्वतंत्रता प्राप्त होती है । वह अपनी इच्छा से अपने मनपसंद और ईमानदार उम्मीदवार को चुन सकता है ।

४) यह चुनाव प्रणाली सरकार में उत्तरदायित्व की भावना पैदा करती है । चुने जाने के बाद प्रतिनिधि अपने किये वादे को पूरा करने के लिए जिम्मेदार होते हैं ।

आज़ाद भारत की चुनौतियां जानने के लिए यहाँ Click करें ।

५) यह प्रणाली लोकतंत्र के अनुकूल है, क्योंकि इसमें जनता व सरकार का सीधा संबंध बना रहता है ।

६) इससे लोगों को राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है और वे अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनते हैं ।

७) इससे सार्वजनिक हित को बढ़ावा मिलता है । और आम व्यक्ति को पहचान के अवसर प्राप्त होते हैं ।

प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के दोष

आइए आप जानते हैं प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के नुकसान के बारे में । हालांकि प्रत्यक्ष चुनाव महत्वपूर्ण, सरल और आसानी से स्वीकृत प्रणाली मानी जाती है । लेकिन इसकी अपनी सीमाएं हैं । इसमें अवगुण भी पाए जाते हैं । इसके कुछ दोष निम्नलिखित हैं ।

१) बहुत बड़े स्तर पर चुनाव होने के कारण यह प्रणाली अपेक्षाकृत अधिक खर्चीली होती है ।

२) इस प्रणाली के अंदर दलबंदी के दोष उजागर हो जाते हैं ।

३) इस प्रक्रिया के अंतर्गत चुनावी प्रचार की चकाचौंध होने के कारण अयोग्य व्यक्ति भी चुने जा सकते हैं ।

४) चुने जाने के बाद प्रतिनिधियों का जनता के प्रति उत्तरदायी बने रहना हमेशा संभव नहीं है । यह जनता के शासन के नाम पर मतदाताओं के साथ धोखा है ।

५) इस प्रणाली में चुनावी भ्रष्टाचार अप्रत्यक्ष रूप से अवश्य पनपने लगता है । जो कि इसकी कमी की ओर इशारा करता है ।

६) इस का मुख्य दोष ये है कि इसमें योग्य व्यक्ति सरकार में पहुंचने से पिछड़ जाते हैं, क्योंकि उनका स्थान चालाक व बेइमान व्यक्ति ले लेते हैं । इस प्रकार कहा जा सकता है कि प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में अनेक दोष है । लेकिन फिर भी यह विश्व के अनेक देशों में अपनाई जाती है । इसको अपनाया जाना ही इसके महत्व को दर्शाता है ।

2) अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली

आइए अब बात करते हैं, निर्वाचन प्रणाली के दूसरे मुख्य प्रकार की । जिसका नाम है, अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली । यह प्रणाली प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली पर ही आधारित है । प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में जो प्रतिनिधि जनता के द्वारा चुने जाते हैं । वह आगे कुछ और प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं । इसे ही अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली कहा जाता है । इस प्रकिया में जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप में भाग नहीं लिया जाता है, बल्कि प्रतिनिधियों का चुनाव जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के निर्वाचक मंडल द्वारा ही होता है ।

अगर हम बात करें, अमेरिका की तो अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव इसी पद्धति के आधार पर होता है । भारत में भी राष्ट्रपति, राज्य सभा तथा विधान परिषदों के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली के आधार पर किया जाता है ।

भारत के राष्ट्रपति की निर्वाचन प्रणाली व शक्तियां के लिए यहाँ Click करें ।

अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के गुण

आइए अब जानते हैं, अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के लाभों के बारे में ।

१) इस प्रणाली के अंतर्गत योग्य तथा कुशल व्यक्तियों का निर्वाचन संभव है, क्योंकि इसमें चुने हुए व्यक्ति ही भाग लेते हैं । जिन्हें सूर्य के व्यक्तियों की परख होती है ।

२) इस निर्वाचन प्रक्रिया में दलबंदी के दोष नहीं होते हैं । इसमें बल और उग्रता का अभाव होता है ।

३) इस प्रणाली में काफी हद तक भ्रष्टाचार से मुक्त रहती है ।

४) इसमें सार्वजनिक मत अधिकार और भीड़ तंत्र के दोषों से छुटकारा मिल जाता है ।

५) इसमें निर्वाचन की पवित्रता बनी रहती है, क्योंकि इसमें चुनाव जीतने के लिए हिंसा अपनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती ।

६) यह प्रणाली प्रत्यक्ष चुनाव प्रकिया की अपेक्षा कम खर्चीली होती है ।

७) निर्वाचन की यह प्रणाली पिछड़े देशों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है ।

अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के दोष

जिस तरह से इस प्रणाली के अपने गुण हैं, उसी तरह से इसमें कुछ अवगुण भी निहित हैं । आइए अब बात करते हैं, अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के नुकसान के बारे में जो निम्नलिखित हैं ।

१) अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली अलोकतांत्रिक है, क्योंकि इसमें मतदाता और प्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष संपर्क टूट जाता है । इसमें निर्वाचक मंडल के सदस्यों को ही अधिक सम्मान मिलता है । आम मतदाता को नहीं ।

२) इस चुनावी प्रकिया में नागरिकों की राजनीतिक चेतना व जागरूकता की कमी होती है ।

३) इस प्रणाली के तहत नागरिकों का मत अधिकार और स्वतंत्रता दोनों सीमित हो जाते हैं ।

४) इसमें भ्रष्टाचार उच्च स्तर पर होता है, क्योंकि सभी मतदाताओं को लुभाने की बजाय गिने-चुने विधायकों को ही अपने पक्ष में करना होता है । इसके लिए गुप्त भ्रष्ट तरीकों का बहुत अधिक प्रयोग होता है ।

५) इस प्रकिया में दलबंदी और सांप्रदायिक भावनाएं अधिक प्रबल हो जाती हैं ।

गठबंधन की राजनीति के बारे में पढ़ने के लिए यहाँ Click करें ।

इस प्रणाली में जहां पर राजनीतिक दल सुव्यवस्थित व्यवस्था में होते हैं । वहां यह प्रकिया नाम मात्र की रह जाती है । अमेरिका में सुव्यवस्थित दल प्रणाली के कारण राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष होते हुए भी प्रत्यक्ष ही माना जाता है ।

निष्कर्ष

अंततः अगर निष्कर्ष के रूप में देखा जाए तो अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली भी प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की तरह ही है । जिसमें गुण और दोष दोनों ही विद्यमान हैं । लेकिन फिर भी इसे अमेरिका व भारत सहित कई देशों में अपनाया जाता है । इसमें दलबंदी और भ्रष्टाचार जैसे आरोप सार्वभौमिक नहीं है, यदि जनता जागरूक है और प्रतिनिधि अपना उत्तरदायित्व को समझते हैं, तो यह प्रणाली काफी महत्व की हो जाती है । सत्य तो यह है कि कहीं पर प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली तो कहीं पर अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली या फिर कहीं पर दोनों को मिश्रित रूप में अवश्य ही अपनाया गया है ।

भारत में लोकसभा का निर्वाचन तो अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली द्वारा तथा राज्यसभा का निर्वाचन अप्रत्यक्ष तरीके से होता है । इसके लिए सारे देश को एक सदस्य निर्वाचन क्षेत्र में बांध दिया जाता है और आधुनिक युग में  एकसदस्यी निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था ही अधिक लोकप्रिय हो चुकी है ।

तो दोस्तों ये था, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली । इनकी विशेषताएं, महत्व, गुण और दोष । अगर Post अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ ज़रूर Share करें । तब तक के लिए धन्यवाद !!

Leave a Reply