हॉब्स के व्यक्तिवाद संबंधी विचार

Thoughts on Individual by Thomas Hobbes

Hello दोस्तों ज्ञानउदय में आपका एक बार फिर स्वागत है और आज हम बात करते हैं, पश्चिमी राजनीति विचार के अंतर्गत हॉब्स के व्यक्तिवाद विचारों के बारे में । इस Post में हम जानेंगे,  हॉब्स के व्यक्तिवाद विचारधारा के तत्व और उनकी आलोचनाओं के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं ।

हॉब्स का जीवन परिचय

थॉमस हॉब्स को एक समझौतावादी विचारक माना जाता है । हॉब्स का जन्म ब्रिटेन के मेलम्सबरी में 1588 को हुआ । उनके जन्म के वर्ष में आर्मेडा का युद्ध हुआ था तथा ब्रिटेन में सभी जगह अशांति और डर का माहौल बना हुआ था । हॉब्स के पिता एक पादरी थे । इसी वजह से हॉब्स को  बाइबल का अच्छा ज्ञान था, लेकिन हॉब्स का धर्म के प्रति लगाव बहुत कम था । अपने जन्म को लेकर हॉब्स का एक कथन बहुत फेमस है,  वह यही कि-

“आर्मेडा युद्ध के वर्ष में दो जुड़वाओं का जन्म हुआ । जिसमें एक भय था और दूसरा मैं ।”

हॉब्स ने अपने जीवन में अनेक रचनाएं की । जिनका उनके जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा और इस प्रकार उनकी मृत्यु सन 1679 में 91 वर्ष की आयु में हुई ।

हॉब्स की जीवन परिस्थिति और रचनाओं के बारे में पढ़ने के लिए यहाँ Click करें ।

हॉब्स की व्यक्तिवाद विचारधारा

निरपेक्ष संप्रभुता का कट्टर समर्थक होते हुए भी हॉब्स को कई अर्थों में व्यक्तिवादी का समर्थक माना जाता है । राजनीतिक विचारधारा में जहां हॉब्स को निरंकुश और असीमित संप्रभुता का प्रतिपादक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर हॉब्स की विचारधारा में व्यक्तिवाद के तत्व भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं ।

हॉब्स के अनुसार व्यक्ति साध्य है, और राज्य साधन मात्र । हॉब्स की व्यक्तिवाद की मूल धारणा इस बात पर आधारित है कि जितने भी संघ, समुदाय, संस्थाएं और राज्य हैं । वह सब व्यक्तियों द्वारा ही निर्मित हैं । व्यक्ति ही उनकी इकाई है और यह सब अपने में सम्मिलित व्यक्तियों से अलग कुछ भी नहीं है । इस दृष्टि से व्यक्ति साध्य हैं और राज्य केवल साधन मात्र है । इस प्रकार हॉब्स के दर्शन का प्रारंभिक सूत्र व्यक्ति हैं । समाज अथवा राज्य नहीं ।

हॉब्स के व्यक्तिवाद पर टिप्पणी करते हुए सोबाइन ने कहा है कि

“हॉब्स के चिंतन में व्यक्तिवाद का तत्व पूर्ण रूप से आधुनिक है ।”

इसके अलावा एक और विचारक डर्निंग का मानना है कि

“हॉब्स के सिद्धांत में राज्य की शक्ति का उत्कर्ष होते हुए भी उसका मूलाधार पूर्ण रूप से व्यक्तिवादी है । वह सब व्यक्तियों के प्रकृति समानता पर बल देता है ।”

विचारधारा में व्यक्तिवाद तत्व

हॉब्स की इस विचारधारा में व्यक्तिवाद के तत्व किन किन रूपों में देखे जा सकते हैं । उसके बारे में जानते हैं, निम्नलिखित तथ्यों से यह स्पष्ट होता है ।

1) व्यक्तिवाद व्यक्ति को अलग अलग इकाई के रूप में मानकर हर व्यक्ति की इच्छा और स्वतंत्रता पर बल देता है । हॉब्स ने भी अपने विचारों में इसी प्रकार के मनुष्य का वर्णन किया है, जिसमें प्राकृतिक अवस्था में व्यक्ति अलग-अलग रहते हैं और हॉब्स के समझौते सिद्धांत में व्यक्ति ही प्रधान हैं । हर एक व्यक्ति ने प्रत्येक व्यक्ति के साथ समझौता किया है और हॉब्स ने संप्रभु को समझौते में शामिल ना करके अपने व्यक्तिवाद का प्रश्न दिया है ।

हॉब्स के संप्रभुता सिद्धांत को पढ़ने के लिए यहाँ Click करें ।

2) हॉब्स एक समझौतावादी विचारक हैं और उनके अनुसार राज्य प्रथम संस्था है । जिसका निर्माण सामाजिक समझौते के आधार पर हुआ है । हॉब्स का मानना है कि व्यक्तियों ने अपनी सुख, शांति तथा सुरक्षा के लिए राज्य का निर्माण किया है और हॉब्स के अनुसार व्यक्ति के स्वार्थ से अलग किसी संस्था का उद्देश्य नहीं हो सकता है और ना होना चाहिए ।

3) व्यक्तिवाद की मूल मान्यता यह है कि राज्य साधन है और व्यक्ति साध्य है । इस दृष्टि से देखा जाए तो हॉब्स का मानना है कि राज्य व्यक्ति के लिए हैं, व्यक्ति राज्य के लिए नहीं । क्योंकि उसके अनुसार राज्य का अस्तित्व व्यक्ति के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए बनाया गया है ।

4) हॉब्स के विचारों में व्यक्तिवाद की चरम स्थिति उस स्थान पर दृष्टिगत होती है, जब वह कहता है कि राज्य की स्थापना व्यक्तियों के द्वारा आत्मरक्षा के लिए की गई है । इसलिए राज्य की आज्ञा का पालन करना व्यक्ति का कर्तव्य है, लेकिन व्यक्ति को राज्य के केवल उन्हीं आज्ञाओं का पालन करना चाहिए, जिनके पालन से व्यक्ति के आत्मरक्षा के अधिकार पर चोट ना पहुंचती हो ।

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लेवायाथन में हॉब्स लिखता है कि संप्रभु यदि व्यक्ति को अपने आप की हत्या करने, आक्रमणकारी को जख्मी ना करने अथवा भोजन, वायु या दवाइयों के सेवन करने से मना करता है, जिस पर उसका जीवन निर्भर करता है । तो व्यक्ति ऐसे आदेशों की आवज्ञा कर सकता है । साथ ही यदि संप्रभु में व्यक्ति के जीवन के रक्षा करने में सामर्थ्य नहीं है, तो वह उसके विरुद्ध विद्रोह कर सकता है । हॉब्स द्वारा व्यक्ति को राज्य के विरोध का जो अधिकार दिया गया है । वह निश्चित रूप से उसे व्यक्तिवाद की दिशा में ले जाता है ।

5) वास्तव में हॉब्स ऐसा पहला दार्शनिक था, जिसने व्यक्ति के हित को उसके जीवित रहने के अधिकार को सभी अधिकारों के ऊपर माना और उसने यह माना कि राज्य का यह दायित्व है कि वह समाज में शांति की व्यवस्था करें और व्यक्तियों के जीवन और संपत्ति को सुरक्षित रखें और हॉब्स का मानना है कि राज्य व्यक्ति के स्वार्थ सिद्धि का साधन मात्र है ।

6) हॉब्स को यद्यपि कट्टर निरंकुशतावाद का समर्थक माना जाता है, लेकिन उसका निरंकुशतावाद पूरी तरह कट्टर नहीं है, क्योंकि लेवायाथन को अनुचित हस्तक्षेप का कोई शौक नहीं है । वह केवल व्यक्तियों के अनियंत्रित इच्छाओं और गतिविधियों पर रोक लगाता है । जिसके कारण वह व्यक्ति स्वयं का ही नुकसान न कर लें ।

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इस प्रकार से हॉब्स को प्राय निरंकुश राज्य का उग्र समर्थक माना जाता रहा है । लेकिन वास्तव में व्यक्ति के हित का समर्थक होने के कारण उसे प्रबल व्यक्तिवादी भी माना जा सकता है । इसी कारण से सेबाइन कहते हैं कि हॉब्स के संप्रभु की सर्वोच्च शक्ति उसके व्यक्तिवाद की आवश्यक पूरक है ।

हॉब्स के व्यक्तिगत विचारों की आलोचना

आइए जानते हैं, हॉब्स व्यक्तिवादी कुछ आलोचनाओं के बारे में भी । बहुत सारे आलोचकों का मानना है कि हाउस ने अपने दर्शन में जानबूझकर व्यक्तिवादी तत्वों को प्राथमिकता नहीं दी । वह केवल एक सर्व सत्तावादी निरंकुश राज्य की स्थापना करना चाहता था ।

इसके अलावा हॉब्स व्यक्तियों के लिए कुछ स्वतंत्रताओं की बात करता है । लेकिन वास्तव में कानून निर्माण की शक्ति लेवायाथन के पास है और वह व्यक्तियों को कितनी स्वतंत्रता देगा । वह उसके हाथ में है ना कि व्यक्तियों के ।

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परंतु कुछ आलोचकों का यह भी मानना है कि हॉब्स के व्यक्तिवाद के महत्व को कम नहीं किया जा सकता है । उसने राज्य के व्यक्तियों को सन्मार्ग पर, शांति के मार्ग पर ले जाने के लिए एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न शासक की रचना की । उसने व्यक्तियों को कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वतंत्रता का अधिकार भी प्रदान किया है । जिससे उसका संपूर्ण राजनीतिक दर्शन व्यक्ति प्रधान हो जाता है ।

इस तरह से कहा जा सकता है कि हॉब्स ने अपने व्यक्तिवाद सिद्धांत की रचना व्यक्तित्व के ताने बाने से की है । इस दृष्टि से वह एक महानतम व्यक्तिवादी है ।

तो दोस्तो ये था हॉब्स का व्यक्तिवाद सिद्धांत (Thoughts on Individual by Thomas Hobbes), इसमें हमने पढ़ा हॉब्स के व्यक्तिवादी तत्व, उनके विचार और आलोचनाओं के बारे में । अगर Post अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तो के साथ ज़रूर Share करें । तब तक के लिए धन्यवाद !!

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