राजनीति सिद्धांत का परिचय
Hello दोस्तों ज्ञान उदय में आपका स्वागत है । आज हम बात करते राजनीती के सिद्धांत के बारे में । सबसे पहले जानते हैं कि राजनीति अथवा राजनीति विज्ञान क्या है ? तो सबसे पहले राजनीति के बारे में जानते हैं । Politics या जो राजनीति है, ये मानव समाज का अनिवार्य अंग है और राजनीति का जन्म इस तथ्य से होता है कि हमारे और हमारे समाज के लिए क्या उचित है ? क्या वांछनीय है और क्या नहीं ? इस बारे में सभी लोगों की दृष्टि और राय अलग-अलग हो सकती है । लेकिन इसमें या राजनीति में समाज में चलने वाली तमाम तरह की विचारधाराएं, वार्ताएं और विचार शामिल हैं । जिनके माध्यम से लोग सामूहिक निर्णय लेते हैं । और एक स्तर से इन वाद-विवाद, वार्ताओं और सरकार के कार्यों को जनता से जुड़ा होना इसमें शामिल होता है । दूसरे स्तर पर इसमें जनता का संघर्ष और उसके निर्णय लेने पर संघर्ष का प्रभाव होता है आप जानते हैं कि जहां पर संघर्ष या विवाद उत्पन्न होता है, वहां पर राजनीति उत्पन्न होती है और राजनीति से ही इन आपसी संघर्ष और विवादों का समाधान करने का प्रयास किया जाता है ।
राजनीति क्या है ?
राजनीति हमारे समाज से अनिवार्य रूप से जुड़ी है । या फिर यह कहा जाए कि जनता भी राजनीति में संलग्न है या लगी हुई है । सबसे पहले जानते हैं, पॉलिटिक्स । तो आप जान लीजिए दोस्तों पॉलिटिक्स शब्द अंग्रेजी भाषा के जो है पॉलिटिकल साइंस का पर्याय है । आप जानते हैं कि पॉलिटिक्स जो है इसी से पॉलिटिकल साइंस जो विषय है वो उत्पन्न हुआ है । और Greek या यूनानी भाषा का जो पोलिश शब्द है पोलिस। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है । यूनान में छोटे-छोटे नगर राज्य होते थे, जिनको सिटी, स्टेट या पुलिस कहा जाता था। इसी शब्द से राजनीति या राजनीति विज्ञान की उत्पत्ति हुई है । और आप जान लीजिए कि प्राचीन काल में यूनान के जो नगर राज्य होते थे, वो अपना शासन स्वयं चलाते थे और इसी को Polish या पॉलिटिक्स कहा गया है । यूनानी समाज में पुलिस के मामले बहुत ही महत्वपूर्ण होते थे । अरस्तु ने इनके अध्ययन को सर्वोच्च विज्ञान या मास्टर साइंस कहा था । क्योंकि सब कुछ या विज्ञान के या अध्ययन के जितने भी क्षेत्र हैं वह पॉलिश में शामिल हो जाते थे । इसीलिए अरस्तु ने इसको मास्टर साइंस या सुप्रीम साइंस की संज्ञा दी है ।
यूनानी नगर राज्यों की गतिविधियों में हिस्सा लेने का अधिकार केवल स्वतंत्र जनों को था और अरस्तु भी कहता है कि इसमें स्त्री दास और बाहर के लोगों को इसमें भाग लेने का या राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार नहीं था । तो प्राचीन यूनान में नगर राज्य जिसको सिटी स्टेट या पुलिस कहते हैं। ये बहुत महत्वपूर्ण होते थे । ये अपना शासन स्वयं चलाते थे । एक विचारक हैं दोस्तों हेराल्ड लासवेल । हेराल्ड लासवेल को आप जानते हैं कि ये राजनीति के शक्तिवादी विचारधारा के पोषक हैं । इन्होंने कहा है कि राजनीति विज्ञान में यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि शक्ति या सत्ता किस रूप में पाई जाती है और इसका प्रयोग कौन-कौन किस-किस के साथ मिलकर करता है । तो यह बहुत ही महत्वपूर्ण है हेराल्ड लासवेल की परिभाषा । एक और परिभाषा है जो कि आधुनिक राजनीतिक विचारक हैं एलेन बॉल । एलेन बाल के द्वारा दी गई है। वो कहते हैं कि राजनीतिक गतिविधि या जो पॉलिटिकल प्रोसेस होता है जो कार्य गतिविधियां शामिल होती हैं । राजनीतिक गतिविधि मतभेदों की उपस्थिति और उन मतभेदों के समाधान के प्रयास का संकेत मिलता है ।
राजनीतिक गतिविधि में मतभेद
राजनीतिक गतिविधि में मतभेद यानी आपसी वाद-विवाद शामिल होते हैं और उनका समाधान कैसे किया जाए इसका संकेत मिलता है । साथ ही साथ राजनीतिक जो क्रियाविधि है या स्थिति है, इसका सार तत्व यह है कि संघर्ष और उसका समाधान । तो संघर्ष और उसका समाधान राजनीतिक गतिविधि सबसे महत्वपूर्ण है एललेन बॉल के अनुसार और ये परिभाषा इन्होंने अपनी पुस्तक मॉडर्न पॉलिटिक्स एंड गवर्नमेंट में दिया है । तो यहां से एक तथ्य आप ये याद रखिए । ये एलन बॉल की पुस्तक है, मॉडर्न पॉलिटिक्स एंड गवर्नमेंट । इसमें उन्होंने कहा है कि राजनीति गतिविधि में मतभेद होते हैं । उन मतभेदों के समाधान का प्रयास किया जाता है और राजनीति का सार तत्व संघर्ष और उस संघर्ष का समाधान है। एक विचारक हैं बिस्मार्क ऑटो वान बिस्मार्क। बिस्मार्क ने कहा है दोस्तों कि राजनीति जो है वो संभाव्य की कला है। यानी पॉलिटिक्स इज द आर्ट ऑफ पॉसिबल। याद रखिएगा पॉलिटिक्स इज द आर्ट ऑफ पॉसिबल । राजनीति संभाव्य की कला है । ये ऑटो वान बिस्मार्क के द्वारा कहा गया है ।
जनीति की परिभाषा
ये भी बहुत ही महत्वपूर्ण है । और एक और देखिए बहुत ही महत्वपूर्ण परिभाषा जो बार-बार पूछी जाती है । इससे संबंधित एक और तथ्य मैं बताऊंगा आपको कि राजनीति का संबंध समाज में मूल्यों के आधिकारिक आवंटन से है । यह किसके द्वारा दी गई परिभाषा है ? तो आप सभी जानते हैं यह डेविड ईस्टन के द्वारा दी गई परिभाषा है । लेकिन यह परिभाषा उनकी किस पुस्तक में दी गई है? तो ये है द पॉलिटिकल सिस्टम एंड इंक्वायरी इंटू द स्टेट ऑफ पॉलिटिकल साइंस। और ये पुस्तक डेविड ईस्टन की 1953 में प्रकाशित हुई थी। याद रखिएगा राजनीति का संबंध समाज में मूल्यों के आधिकारिक आवंटन से है। यह परिभाषा डेविड ईस्टन ने द पॉलिटिकल सिस्टम एंड इंक्वायरी इंटू द स्टेट ऑफ पॉलिटिकल साइंस 1953 में दिया है। तो ये आप इसको तैयार कर लीजिएगा । कभी भी पूछा जा सकता है । थोड़ा सा कभी-कभी यह भी पूछता है कि राजनीति का जो परंपरागत दृष्टिकोण है और आधुनिक दृष्टिकोण इसमें क्या अंतर है ? तो राजनीति विज्ञान का जो परंपरागत दृष्टिकोण है आप सामान्य रूप से जान लीजिए कि इसमें आदर्श मानक और इतिहास तथा दर्शन पर विशेष बल दिया गया है । यानी राजनीति विज्ञान का जो परंपरागत दृष्टिकोण है यह आदर्शों मानकों इतिहास मूल्यों पर विशेष बल देता है ।
इसका स्वरूप अमूर्त है और इसमें काल्पनिकता और दार्शनिकता पर विशेष बल दिया गया है । तो परंपरागत दृष्टिकोण जो राजनीति विज्ञान का है उसकी विशेषताएं आदर्श मानक इतिहास दर्शन पर आधारित है । अमूर्त स्वरूप का है। इसमें काल्पनिकता और दार्शनिकता पर विशेष बल दिया गया है और इसमें मुख्य बात इसमें मूल्यों की प्रधानता है | राजनीति विज्ञान के परंपरागत दृष्टिकोण में । आधुनिक दृष्टिकोण में आदर्श मानक इतिहास और दर्शन के साथ देखिए आदर्श मानक इतिहास और दर्शन के साथ इसमें अनुभवात्मक दृष्टिकोण या अनुभव मूलक दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया गया है । तो इस तरह से हम परंपरागत दृष्टिकोण और आधुनिक दृष्टिकोण को समझ सकते हैं ।
राजनीति सिद्धांत के दृष्टिकोण
देखिए राजनीति विज्ञान में कई प्रकार के दृष्टिकोण अध्ययन के दृष्टिकोण शामिल हैं । उनकी विशेषताएं देख लेते हैं । तो एक है लिबरल व्यू या उदारवादी दृष्टिकोण । राजनीति विज्ञान का जो उदारवादी या लिबरल व्यू है ये राजनीति को परस्पर विरोधी हितों में सामंजस्य का साधन मानता है । प्रश्न पूछा जा सकता है कि कौन सा दृष्टिकोण या राजनीति विज्ञान के अध्ययन का कौन सा दृष्टिकोण राजनीति को परस्पर विरोधी हितों में सामंजस्य का साधन मानता है ? तो ये है उदारवादी दृष्टिकोण । मार्क्सवादी दृष्टिकोण के बारे में आप सभी जानते हैं । मार्क्सवादी दृष्टिकोण ये मानता है कि राजनीति वर्ग संघर्ष का परिणाम है और ये समाज में परस्पर विरोधी वर्गों के आपसी संघर्षों से ये संचालित होता है। इसी तरह समुदायवादी दृष्टिकोण है । इसमें ये माना जाता है जो कम्युनिटेरियन व्यू है इसके अंतर्गत ये माना जाता है कि व्यक्ति जो है वो समाज का अभिन्न अंग है । और इसका जो कॉमन गुड है या साझा हित है उनकी सिद्धि का प्रयास राजनीति को मानता है । ये समुदायवादी दृष्टिकोण तो इसको आप अच्छे से देख लीजिएगा । यह बहुत ही महत्वपूर्ण है । राजनीति विज्ञान का उदारवादी दृष्टिकोण राजनीति को परस्पर विरोधी हितों में सामंजस्य का साधन मानता है। मार्क्सवादी दृष्टिकोण मानता है कि राज्य वर्ग संघर्ष का परिणाम है और यह वर्ग संघर्ष परस्पर विरोधी वर्गों के आपसी हितों की वृद्धि करने के कारण होता है ।
समुदायवादी दृष्टिकोण व्यक्ति को समुदाय का अभिन्न अंग मानता है और यह मानता है कि राज्य व्यक्तियों के कॉमन गुण या साझे हितों की सिद्धि या प्राप्ति के प्रयास का साधन है । दोस्तों एक और देख सकते हैं आप कोई भी जो विज्ञान है, कोई भी अध्ययन का जो शास्त्र है, वह अन्य विषयों से भी प्रभावित होता है । किसी से अलग नहीं हो सकता है । राजनीति विज्ञान और इतिहास एक दूसरे से बहुत अधिक संबंधित हैं । इसीलिए माना जाता है कि राजनीति विज्ञान का जो अध्ययन है वो इतिहास के संदर्भ में किया जाए तो बहुत बेहतर होता है । एक परिभाषा है सच्ची राजनीति इतिहास का दर्शन है। रियल पॉलिटिक्स इज द फिलॉसफी ऑफ़ हिस्ट्री। यह हेराल्ड जोसेफ लास्की का कथन है। वैसे इतिहास और राजनीति को व्याख्या करने वाली सबसे महत्वपूर्ण परिभाषाएं शीले के द्वारा दी गई हैं। शीले कहते हैं कि राजनीति के बिना इतिहास निष्फल है और इतिहास के बिना राजनीति निरर्थक है ।
इसी तरह इतिहास अतीत की राजनीति है और राजनीति वर्तमान का इतिहास है । ये शीले के द्वारा दी गई परिभाषाएं हैं । इसी में एक छोटी सी परिभाषा है कि इतिहास राजनीति की पाठशाला है। ये शीले के द्वारा दी गई परिभाषा है । तो याद रखिएगा इतिहास और राजनीति पर जो भी प्रमुख परिभाषाएं हैं वो शीले के द्वारा दी गई हैं । शीले के द्वारा जो महत्वपूर्ण परिभाषा है वो ये है कि राजनीति के बिना इतिहास निष्फल है। इतिहास के बिना राजनीति निरर्थक है या फिर इतिहास अतीत की राजनीति है और राजनीति वर्तमान का इतिहास है । ये जॉन शीले के द्वारा दी गई परिभाषा है।
राजनीति विज्ञान और राजनीति सिद्धांत
हम लोग राजनीति विज्ञान और राजनीति सिद्धांत पढ़ रहे हैं । तो राजनीतिक सिद्धांत या पॉलिटिकल थिअरी क्या है ? आप समझ सकते हैं आसानी से कि राजनीतिक सिद्धांत उन विचारों और नीतियों को व्यवस्थित रूप से प्रतिबंधित करता है जिनसे हमारा सामाजिक जीवन सरकार और संविधान आकार ग्रहण करता है। आप सभी जानते हैं कि राजनीतिक सिद्धांतों में स्वतंत्रता, समानता, न्याय, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता जैसी अवधारणाएं हैं और राजनीतिक सिद्धांत इन अवधारणाओं का अर्थ और उसकी व्याख्या करने का प्रयास करता है। आप जान लीजिए कि रूसो मार्क्स गांधी जी राजनेता तो नहीं बन पाए लेकिन उनके विचारों ने हर जगह राजनेताओं को प्रभावित किया और कई ऐसे समकालीन विचारक भी हैं जो अपने समय में लोकतंत्र या स्वतंत्रता के बचाव के लिए उनसे प्रेरणा लेते हैं और राजनीतिक सिद्धांतकार जो होते हैं वो विभिन्न प्रकार के राजनीतिक अनुभवों की छानबीन करते हैं। भावी रुझान क्या होंगे, संभावनाएं क्या होंगी, उनको भी चिन्हित करने का प्रयास करते हैं । तो राजनीतिक सिद्धांत उन विचारों, नीतियों को व्यवस्थित रूप से प्रतिबिंबित या व्यवस्थित रूप से हमारे सामने स्पष्ट करता है जो कि हमारे सामाजिक, राजनीतिक जीवन, सरकार और संविधान से संबंधित होते हैं। राजनीतिक सिद्धांत में कुछ विशेषताएं भी पाई जाती हैं । जैसे यह अवधारणाओं पर आधारित होता है। सामान्यीकरण किया जाता है चीजों का । इसमें तार्किकता होती है, सार्वभौमिकता होती है और इसके अलावा वस्तु परकता और अनुभव मूलक अध्ययन राजनीतिक सिद्धांत में शामिल होते हैं । तभी जाकर ये राजनीतिक सिद्धांत बन पाता है । राजनीतिक सिद्धांत में कई पक्षों का अध्ययन किया जाता है । जैसे जॉर्ज कैटलिन कहते हैं कि राजनीतिक सिद्धांत राजनीति विज्ञान और राजनीतिक दर्शन दोनों का मिश्रण है । यह याद रखिएगा। जॉर्ज कैटलिन के अनुसार राजनीतिक सिद्धांत, राजनीति विज्ञान और राजनीतिक दर्शन दोनों का मिश्रण है ।
राजनीतिक सिद्धांत या पॉलिटिकल थ्योरी के मुख्य रूप से तीन कार्य हैं । कौन-कौन ? वर्णन, पुनर्निर्माण और समालोचना । यानी डिस्क्रिप्शन, रिकंस्ट्रक्शन और क्रिटिसिज्म। वर्णन क्या है? कोई भी अवधारणा आती है तो उसका वर्णन इसमें किया जाता है। उसमें कोई संशोधन या कोई नई चीजें शामिल होती है तो रिकंस्ट्रक्शन या पुनर्निर्माण होता है और फिर उनकी समालोचना भी उसमें की जाती है ताकि नए विचार और सिद्धांतों की रचना की जा सके या उनका वर्णन किया जा सके राजनीतिक सिद्धांत जो होता है इसके दो अंग होते हैं । राजनीतिक सिद्धांत के मुख्य रूप से दो अंग हैं। इसमें राजनीतिक संकल्पनाएं और विचार तथा राजनीतिक संस्थाएं और व्यवहार शामिल होते हैं । आप सभी जानते हैं । तो याद रखिएगा राजनीतिक सिद्धांत के तीन मुख्य कार्य हैं। वर्णन पुनर्निर्माण और समालोचना। राजनीतिक सिद्धांत के दो मुख्य अंग हैं जिसमें राजनीतिक संकल्पनाएं और विचार शामिल हैं तथा राजनीतिक संस्थाएं और व्यवहार शामिल है। राजनीति विज्ञान जो है आप जान लीजिए कि राजनीति विज्ञान अनुभव मूलक ज्ञान को मान्यता देता है और राजनीतिक दर्शन इस बात पर विचार करता है कि उत्तम या अच्छा जीवन किस तरह से प्राप्त किया जा सकता है। ये देखिए बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य हैं। कुछ तथ्य जो परीक्षाओं की दृष्टि से बेहद इंपॉर्टेंट हैं ।
इनको जान लेना जरूरी है देखिए प्रथम अनुभववादी विचारक किसको माना जाता है ? बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य है कि राजनीति विज्ञान में प्रथम अनुभववादी विचारक किसे माना जाता है ? तो अरस्तु, अरस्तु राजनीति विज्ञान के जनक हैं और इनको प्रथम अनुभववादी विचारक माना जाता है। व्यवहारवादी राजनीति का बौद्धिक जनक किसको माना जाता है? तो चार्ल्स मेरियम को व्यवस्था सिद्धांत या सिस्टम थ्योरी के जनक कौन हैं? डेविड ईस्टन। याद रखिएगा डेविड ईस्टन व्यवस्था सिद्धांत या सिस्टम थ्योरी के प्रतिपादक माने जाते हैं। एक और प्रश्न है कि कौन सा विचारक व्यवस्था सिद्धांत की आलोचना करते हुए इसको ब्लैक बॉक्स मॉडल कहता है? तो ये हैं आमंड और पावेल। आमंड और पावेल ने सिस्टम थ्योरी की आलोचना की और इसको ब्लैक बॉक्स मॉडल की संज्ञा दी है। और इन्होंने व्यवस्था सिद्धांत की आलोचना के बाद संरचनात्मक प्र्यात्मक मॉडल जो है स्ट्रक्चरल फंक्शनल मॉडल प्रयोग किया और इनकी पुस्तक क्या है ये जानना जरूरी है। बहुत ही महत्वपूर्ण पुस्तक है कि पॉलिटिक्स ऑफ द डेवलपिंग एरियाज। यहां पर मैं नोट कर दे रहा हूं। पॉलिटिक्स ऑफ द डेवलपिंग डेवलपिंग एरियाज। ये आमंड और पावेल की पुस्तक है जो 1960 में प्रकाशित हुई थी। इसी पुस्तक में इन्होंने संरचनात्मक प्रियात्मक मॉडल का वर्णन किया है। कुछ और महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं जैसे मॉडर्न डेमोक्रेसीज और द अमेरिकन कॉमनव्थ ये जेम्स ब्राइस द्वारा लिखी गई पुस्तकें हैं। याद रखिएगा द मॉडर्न डेमोक्रेसीज और अमेरिकन कॉमनव्थ ये जेम्स ब्राइस की पुस्तकें हैं। न्यू आस्पेक्ट्स ऑफ पॉलिटिक्स आप जानते हैं चार्ल्स मेरियम की है ।
इसी तरह प्राइमरी इलेक्शन पुस्तक भी चार्ल्स मेरियम के द्वारा लिखी गई है। वन डायमेंशनल मैन हरबर्ट मार्क्यूजे की पुस्तक है और द डिक्लाइन ऑफ पॉलिटिकल थिअरी राजनीतिक सिद्धांत का पतन ये एक लेख है जिसको अल्फ्रेड कोबन ने लिखा है। राजनीतिक सिद्धांत के पतन से संबंध में पतन के संबंध में कई विचारकों ने अपने विचार दिए हैं। जैसे डेविड ईस्टन ने इतिहासवाद को राजनीतिक सिद्धांत के पतन का कारण माना है। व्यवहारवाद को भी राजनीतिक सिद्धांत के पतन का कारण माना जाता है। इसका कारण ये है कि व्यवहारवाद के अंतर्गत केवल तथ्यों को महत्व दिया गया जिससे मूल्य महत्वहीन हो गए और इससे राजनीतिक आदर्श और मूल्यों की उपेक्षा की जाने लगी। और एक विचारक हैं जर्मिनो इनको भी राजनीतिक सिद्धांत में पतन का विचारक माना जाता है। इन्होंने प्रत्यक्षवाद को राजनीतिक सिद्धांत के पतन का कारण माना है। तो बहुत ही महत्वपूर्ण है अल्फ्रेड कोबेन इनकी पुस्तक है द डिक्लाइन ऑफ पॉलिटिकल थ्यरी। ये पुस्तक नहीं एक लेख है जिन जिसमें इन्होंने राजनीतिक सिद्धांत के पतन की बात कही है । तो दोस्तों ये था आज का Post । इसमें हमने राजनीति विज्ञान और राजनीतिक सिद्धांत के शुरुआती अह चैप्टर और इसमें निहित जो परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य हैं, उन पर हमने चर्चा किया और ये तथ्य और प्रश्न आपके परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आप इनको अच्छे से तैयार कर लीजिएगा । धन्यवाद ।
