लोकतंत्र क्या है ?
Hello दोस्तों ज्ञान उदय में स्वागत है | आज हम बात करते है लोकतंत्र के बारे में | इस Post में हम जानेंगे कि लोकतंत्र क्या है? लोकतंत्र कितने प्रकार के होते हैं ? भारत में कौन सी लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया गया है और लोकतंत्र से जुडी हुई महत्वपूर्ण बातें क्या हैं ?
लोकतंत्र क्या है
जो हमसे परीक्षाओं में पूछे जाती हैं वह सभी हम आज की इस Post में जानेंगे तो दोस्तों लोकतंत्र को इंग्लिश में Democracy कहा जाता है | दोस्तों अगर हम बात करें लोकतंत्र की तो लोकतंत्र दो शब्दों से मिलकर बना है लोक और तंत्र | दोस्तों लोक का मतलब होता है लोग या फिर जनता और तंत्र का मतलब होता है, शासन | तो दोस्तों लोकतंत्र का मतलब होता है, जनता का शासन | लोकतंत्र एक ऐसी सफल प्रणाली है, जिसमें कि देश की सभी सर्वोच्च शक्तियां जो होती है, वहां की जनता में निहित होती है | वहां के जनता के द्वारा उस देश की शासन व्यवस्था चलाई जाती है | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के अनुसार लोकतंत्र की परिभाषा इस तरह है |
“जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा किया गया शासन है |”
यानि कि लोकतंत्र में व्यवस्था होती है, वह जनता का शासन व्यवस्था होता है ठीक है और उस अवस्था होती है वह जनता के लिए चलाई जाती है यानि कि अनुशासन का मुख्य उद्देश्य उस देश की जनता की भलाई होती है ठीक है यानि कि वहां की जनता होती है उसके लिए व्यवस्था कराई है और वह जनता के द्वारा चलाई जाती है ठीक है यानि कि जनता में से ही कुछ लोगों के समूह होता है जो कि वह इसमें शासन चलाता है यानि कि जो वहां की जनता होती है वह अपने द्वारा कुछ लोगों को चुन लेती है और वह इच्छुक समूह होता है, वह शिक्षण व्यवस्था को चलाता है और दोस्तों लोकतंत्र की जो क्षमता होती है वहां के लोगों की भागीदारी की क्षमता पर निर्भर करता है यानि कि किसी भी देश का लोकतंत्र तभी वह जरा मजबूत होगा जब वहां से जो लोग होंगे |
लोकतंत्र के प्रकार
वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में ज्यादा भागीदारी निभाएंगे वहां पर जितनी जगह भागीदारी निभाएंगे लोकतांत्रिक व्यवस्था उस देश की उतनी ही ज्यादा मजबूत होगी और लोकतंत्र मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं |
पहला होता है, प्रत्यक्ष लोकतंत्र जिसे इंग्लिश में Direct Democracy कहा जाता है और
दूसरा होता है, अप्रत्यक्ष लोकतंत्र जिसे English में कि Indirect Democracy कहा जाता है |
प्रत्यक्ष लोकतंत्र में जो जनता होती है वह शासन व्यवस्था में सीधे तौर पर भागीदारी नहीं होती है, जैसे कि स्विटजरलैंड में वहीं अगर बात करें अप्रत्यक्ष लोकतंत्र की तो इसमें वह अपने प्रतिनिधियों को सुनती है और वह जो प्रतिनिधि होते हैं, उनके द्वारा शासन व्यवस्था को चलाया जाता है | अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में जो होता है वह बड़े देशों में पाई जाती है यहां पर लोगों की संख्या ज्यादा होती है जबकि प्रत्यक्ष लोकतंत्र कम जनसंख्या वाले देशों में लागू होता है | भारतीय संविधान के द्वारा संसदीय लोकतंत्र को अपनाया गया है, जो कि एक तरह का प्रत्यक्ष लोकतंत्र है | वह भारत के संविधान में न केवल राजनीतिक लोकतंत्र बल्कि सामाजिक व और आर्थिक लोकतंत्र को भी अपनाया गया है | डॉक्टर अंबेडकर के द्वारा स्व लोकसभा में दिए भाषण में उन्होंने कहा था कि कोई भी राजनीतिक लोकतंत्र तब तक अस्थाई नहीं बन सकता जब तक कि उसके मूल में सामाजिक लोकतंत्र शामिल न हो |
यह सारी चीजें हैं जो कम शब्दों में समझें तो लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें की लोगों के द्वारा व्यवस्था चलाई जाती है और लोकतंत्र किए जो सर्वमान्य परिभाषा है | वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन द्वारा दिए गए परिभाषा ही है यानि कि
“लोकतंत्र जनता के द्वारा जनता के लिए जनता का किया गया शासन है |”
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